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1. कविता में पृथ्वी के घूमने से कौन-सा परिवर्तन होता है?

2. कवि ने "पृथ्वी तुम कोई स्त्री हो" पंक्ति को बार-बार क्यों दोहराया?

3. कविता में पृथ्वी की जल और अग्नि की उपस्थिति किसका प्रतीक है?

4. कविता में पृथ्वी की सतह पर "जल" किसका प्रतीक है?

5. पृथ्वी "कोयलों को हीरों में बदल देती है" इसका क्या अर्थ है?

6. कवि ने पृथ्वी को "गृहस्थी" क्यों कहा?

7. "पृथ्वी तुम घूमती हो तो घूमती चली जाती हो" में "घूमना" किसका प्रतीक है?

8. "रत्नों से ज्यादा रत्नों के रहस्यों से भरा है तुम्हारा हृदय" किसे व्यक्त करता है?

9. पृथ्वी के गर्भ में "अग्नि" होने का क्या महत्व है?

10. कविता में "स्त्री" का संदर्भ किस रूप में दिया गया है?