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1. n समान फेरोंवाली तथा त्रिज्या r की एक वृत्ताकार धारावाही कुण्डली में धारा I स्थापित है, तो इसके केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान होता है –

2. r त्रिज्या और n फेरों वाली किसी वृत्ताकार कुण्डली जिसमें I धारा प्रवाहित हो रही है, उसके केन्द्र पर चुम्बकीय प्रेरण समानुपाती होता है –

3. विधुत धारा व्यक्त करने वाली एक सीधे तार के समीप किसी बिन्दु पर चुम्बकीय-क्षेत्र अनुक्रमानुपाती होता है –

4. दो समांतर तारों में विपरीत दिशाओं में धाराएँ प्रवाहित होती हैं। वे

5. चल कुण्डली गैलवेनोमीटर के बनाने का सिद्धान्त है –

6. चल कुण्डली गैलवेनोमीटर में प्राप्त धारा का मान समानुपाती है –

7. चल कुण्डली गैलवेनोमीटर की सुग्राहिता बढ़ायी जा सकती है –

8. G प्रतिरोध वाले गैलवेनोमीटर के समानांतर में S प्रतिरोध का शंट लगा हो, तब शंट से प्रवाहित धारा होती है –

9. एक गैलवेनोमीटर का प्रतिरोध G है। गैलवेनोमीटर से मुख्य धारा का 1% ( या मुख्य धारा का 1/100) प्रवाहित होगा –

10. एक गैलवेनोमीटर का प्रतिरोध G है। इसमें S ओम का शंट लगाया जाता है। इसके श्रेणी में कितना प्रतिरोध जोड़ा जाय की मुख्य परिपथ में धारा का मान अपरिवर्तित रहती है ?

11. एक गैलवेनोमीटर को आमीटर में बदलने के लिए जोड़ा जाता है –

12. एक गैलवेनोमीटर को वोल्टमीटर में परिवर्तित किया जा सकता है –

13. एक वोल्टमीटर को आमीटर में बदला जा सकता है –

14. एक आदर्श आमीटर का प्रतिरोध होता है –

15. चुम्बकीय बल क्षेत्र का S.I. मात्रक होता है